← सभी ब्लॉग

दुकानदारी

उधार वसूली के 7 तरीके, जिनसे ग्राहक नाराज़ न हो

· ५ मिनट · ApnaMunshi टीम

उधार देना दुकानदारी का हिस्सा है, वसूलना उससे बड़ा। सात आदतें जो पैसा भी वापस लाती हैं और ग्राहक भी बनाए रखती हैं।

मोहल्ले की दुकान उधार के बिना नहीं चलती। ग्राहक भी वही, पड़ोसी भी वही। मुश्किल उधार देने में नहीं, माँगने में है: ज़ोर से माँगो तो ग्राहक जाता है, न माँगो तो पैसा।

ये सात तरीके उन दुकानदारों से सीखे हैं जिनका उधार हर महीने साफ़ होता है।

1. उसी वक़्त लिखिए, ग्राहक के सामने

बहस की जड़ याददाश्त है। जब एंट्री ग्राहक के सामने, उसी पल हो जाए, तो "इतना नहीं था" वाली बात ही नहीं बचती। फ़ोन पर एक लाइन बोलिए और preview ग्राहक को भी दिखा दीजिए।

2. हर ग्राहक की एक सीमा

पाँच सौ, हज़ार, जो भी आपकी दुकान के हिसाब से ठीक हो। सीमा पार होने पर नया उधार नहीं, पहले कुछ जमा। यह नियम पहले दिन बता दीजिए तो बाद में बुरा नहीं लगता।

3. हफ़्ते का एक दिन वसूली का

रोज़ माँगना थका देता है, कभी न माँगना डुबो देता है। शनिवार या रविवार तय कीजिए। उस दिन सुबह "sabka udhaar dikhao" पूछिए और जो लिस्ट आए उसी के हिसाब से बात कीजिए।

Sabka udhaar dikhao

Sabka udhaar: • Suresh — ₹500 • Mohan — ₹120 • Ramesh — ₹100 Kul: ₹720

4. थोड़ा-थोड़ा भी ठीक है

छह सौ बाकी है और ग्राहक सौ दे रहा है? ले लीजिए और लिख लीजिए। पाँच बार सौ लेना, एक बार छह सौ के इंतज़ार से बेहतर है।

Ramesh ne 100 jama kiye

Ramesh — jama ₹100 Pehle: ₹200 baaki Ab: ₹100 baaki Sahi hai? Confirm karne ke liye "haan" likh kar bhejein.

5. माँगने का लहजा

"भैया, छह सौ हो गए हैं, इस हफ़्ते कुछ जमा कर दीजिए" में न शिकायत है, न शर्मिंदगी। जब आपके पास तारीख़ और रकम साफ़ हो, तो बात छोटी रहती है।

6. पुराना बाकी छुपाइए मत

खाता शुरू करते वक़्त जिसका जो पुराना बाकी है, पहले दिन लिख लीजिए। जो रकम कहीं लिखी नहीं, वह धीरे-धीरे माफ़ हो जाती है।

7. तनख़्वाह और त्योहार से पहले हिसाब साफ़

महीने की पहली तारीख़ और दिवाली-ईद से पहले का हफ़्ता, ये दो मौक़े हैं जब ग्राहक के पास पैसा होता है और मन भी। उन्हीं दिनों पुराना साफ़ कराइए, फिर नया खाता खोलिए।

सुझाव: बाकी माँगने से पहले "Ramesh ka hisaab dikhao" करके पूरी history देख लीजिए: कब कितना उधार, कब कितना जमा। जब आप तारीख़ बता सकते हैं, बहस नहीं होती।

ख़ुद आज़मा कर देखिए

WhatsApp पर मुंशी को एक लाइन लिखिए। न ऐप, न फ़ॉर्म, पहली एंट्री अभी।

WhatsApp पर खोलिए